Sunday, October 29, 2017

ये हुआ कुछ वक़्त पहले, जब हुई मुलाकात एक अजनबी से | लहराती बलखाती इतराती सी वो  जब गुजरी मेरे सामने से  - उसकी आँखों में थी कुछ शरारत ; चेहरे पर थी हसी ; एक लटा भी थी चेहरे पर इठलाती  हुई | थी वह थोड़ी शांत, थोड़ी सी  सादा, थोड़ी सी चंचल और एक खूबसूरत बला | रंग था सांवला सा, कद था कुछ ठीक-ठाक सा | वक़्त ने भी कुछ खेल खेला, लफ़्ज़ों से आज मैं खेला , देखो तो क्या लिख बैठा हूँ मैं . .



 [17:45, 10/27/2017]
वो नही कहते मगर आँखे बयां करती हैं;
लम्हो में छुपाकर यादें  रखती हैं;
कुद्द कहने की चाहत ६िपी है लफ्जों मे;
धड़कनें हैं कि इजहार से इन्कार करती है ।

यहीं नहीं रुकी कलम मेरी, उसकी तारीफ में देखो और कुछ भी लिखा है मैंने . .

[17:52, 10/27/2017] 
उसकी हसीं में छुपा है कुद्द ;
इक लहराती इठलाती लटा ने लूटा है मन ;
नजाकत से जब चलती है वो ;
किसी मनचले जैसा इतरा जाता है दिल ।।